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समर्पण हो

>> Monday, August 30, 2010


1
समर्पण हो
लक्ष्‍य को पाने का
मिलता सदा
2
व्‍यवस्थित 
को न मिलती  कभी 
असफलता
3
प्रयास जब
सफल होते सदा
सुयोजना है
4
कर्म के बिना
चाहत है बडी
पूरी कैसे हो
5
दोष सदैव
दिखते हैं, जल्‍दी
आलोचना है 

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सुने न कोई

>> Sunday, August 29, 2010


1
सुने न कोई
कहा हुआ कथन
बुरा लगता
2
दुर्गा से आशा
नवरात्र में होती
मनोकामना
3
प्रभु की याद
रखते नहीं सदा
उम्‍मीद क्‍यों
4
बुरा कहना
आसान होता यारों 
अच्‍छा कहो तो

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नए हाइकु

>> Wednesday, August 25, 2010


1 
ज्ञान के पीछे
पड.ता कर्मयोगी
लक्ष्‍य संग
2
काम के लिए
भ्रष्‍टाचार बढाएं
दे रिश्‍वत
3
ज्ञानयोग है
ज्ञान संग पूर्णता
कर्मठ बन
4
नेता किसी के
न होते कभी सगे
निज स्‍वार्थ
5
आशा किसी से 
रखना न कभी तू
हे कर्मयोगी
6
बिना श्रम के 
बने न कभी कोई
कर्म कर ले
7
आलस्‍य से
सभी दुर्गण आते 
देने को फाके

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दो हाइकु

>> Tuesday, August 24, 2010


1
निश्‍चयी तो
कुछ करके देते
पाते वैभव
2
वाणी हो जैसी
धार होती वैसी
फल में मनु

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नौ हाइकु

>> Monday, August 23, 2010


1
दिल की बात 
जब कोई न सुने
निराशा मिले
2
जीवन का संघर्ष
सीख देता है, सदा
होती प्रगति
3
शिक्षा जीवन को
एक दिशा दे जाती 
देकर लक्ष्‍य
4
आलोचना तो 
सभी करते सदा
प्रशंसा करो
5
गुण मिलते
सुसंगत हो सदा
 सद जीवन 
6
कर्महीन तो
कभी कुछ न पाता
कर्मठ बन
7
आलस्‍य से 
उन्‍नति खो जाती
सक्रिय रहो
8
वाद-विवाद
कलह का कारण
न कर कभी
9
व्‍यवस्‍था से 
जीवन निखरता
सफलता हो

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सात हाइकु

>> Sunday, August 22, 2010


1
खुद जो चाहा
वो करना सदैव
मनचाहा हो
2
थकान देती 
सार्थक काम पर 
प्रसन्‍नता
3
खुशी बांटकर
जीवन सदा पाता
वर खुशी का
4
बिजली कब
तक मिलेगी, यह
कटौती जाने
5
ज्ञान को मित्र
जब तक जानोगे
बाधा दूर जानो
6
कमर कस
कुछ बनके दिखा
करम-बली
7
कलमा पढ.
कलम में जोर हो
कली खिलेगी

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चार हाइकु

>> Saturday, August 21, 2010


1
गर्मी की रात
पसीना ही पसीना
दिन थका सा
2
कर्मठता तो
पहचान है देती
कर्मठ बन
3
गुणी जन को 
प्रशंसा की चाहत
कभी न होती
4
सफलता तो 
प्रयास की चाहत
सतत कर

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छह हाइकु

>> Friday, August 20, 2010


1
एक लकीर
खींची हम सबने
लगे पीटने
2
राज-कार्य
जेब गरम करके
तब कहीं हो
3
नियमित हो 
जब भी व्‍यायाम
नीरोगी काया
4
तनया के
हाथ पीले करके
गंगा नहाए
5
सन्‍तान को 
शिक्षा देना, समझो
जी को मारना
6
नौकरी पाना
कमल खिल जाना
कमाना-खाना

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पांच हाइकु

>> Thursday, August 19, 2010


1 
डाली से तोड़ा
कांटे को भुला दिया
तो पाई पीडा
2
सत्‍संग की 
होगी जब चाहत
सुफल आए
3
ज्ञान बढ़ाए 
जीवन उन्‍नत हो 
सफलता से
4
कमर चूर
परिश्रम व्‍यर्थ
असफलता
5
प्‍यार उड़ेला
सहोदर पर तो
मिला आघात

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एक हाइकु

>> Wednesday, August 18, 2010


बच्‍चे मेरे
जीवन आशा बने
बुढ़ापा हारा

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तीन हाइकु

>> Tuesday, August 17, 2010


1
थकान क्‍यों
बेवजह आराम
कर्म कर ले
2
यादें कांटों सी
पीडा बन सतातीं
कहे बिना यूं
3
सहोदर वे 
अपनापन भूले
धोखा ही धोखा

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मानसूनी हाइकु-डॉ. कंचन पुरी

>> Sunday, October 4, 2009


१.
आंधी की तेजी
बादलों की गर्जना
मानसून आ।
२.
मेघ गरजे
अम्मा बोल उठी
आ देख वर्षा।
३.
झम-झमाझम
बारिश होने लगी
ये हरियाली।
४.
तूफान देख
मांझी लगा किनारे
चिंता घर की।
५.
जून की तपस
खारी बूंदें लुढ़कीं
सूखता गला।
६.
वर्षा रुके ना
लबालब सड़कें
प्रजा हैरान।
७.
दरकते पेड़
बता रहे कहानी
आया तूफान।
८.
बारिश बंद
उग पड़ा सूरज
इन्द्रधनुष।
९.
यज्ञ-प्रार्थना
बादल उमड़ते
मात्र प्रतीक्षा।
१०.
ये तितालिस
पार की गर्म रात
बिना बिजली।
११.
शांति की चाह
हुआ फिर मौन भंग
जीवन-आह।
१२.
बंटी की जिद्
मन आलस आया
हुई ऑउटिंग।
१३.
सोच सकुं कुछ
सोचा न जाए फिर
रीता मन।
१४.
प्रेम उमड़ा
उनको देखकर
निहारें मुझे।
१५.
हर आहट
जानी पहचानी है
प्रतीक्षारत्‌।
१६
कैसा दीवानापन
संयम कहां रहा
सब अर्पण।
१७.
चाहा बहुत
मन खाली कर दूँ
मौका न मिला।
१८.
वाद-विवाद
जब विषम मन
टूटें रिश्ते।
१९.
वाद-विवाद
विषम हुए मन
बढ़ें दूरियां।
२०.
सत्य का भाव
सहयोग हो
बनें रिश्ते।
२१.
सुमिरन हो
इष्टदेवता का
पूरी मुराद।
२२.
कोशिश कभी
असफल नहीं हो
प्रगति संग।
२३.
चांदनी रात
बरसे शीतलता
चहका साथी।
२४.
मन-मयूरी
नाच उठा संसार
ठुमके बच्चे।

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