समर्पण हो
>> Monday, August 30, 2010
1
समर्पण हो
लक्ष्य को पाने का
मिलता सदा
2
व्यवस्थित
को न मिलती कभी
असफलता
3
प्रयास जब
सफल होते सदा
सुयोजना है
4
कर्म के बिना
चाहत है बडी
पूरी कैसे हो
5
दोष सदैव
दिखते हैं, जल्दी
आलोचना है
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